Sunday, November 27, 2011

उत्तर प्रदेश विधानसभा में सियासी अखाड़ा बना उन्नाव जिला !

उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव को मद्देनजर रखते हुए जिले की विधानसभा सीटों  के लिए दावेदार सभी पार्टियों के कार्यालयों में टिकट के चक्कर में आते -जाते नजर आ रहे हैं ,तो कहीं पार्टी द्वारा प्रत्याशी नियुक्त हों जाने पर दावेदार जनता को रिझाने के लिए तरह -तरह  हथकंडे  अपनाते  नजर आ रहे हैं ,इसमें से सबसे ज्यादा चुनावी सरगर्मियां उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ  से ५५ किमी दूर उन्नाव जिले में तेज़ है ,विशेष  बात यह है की यह लखनऊ और कानपुर के मध्य का भाग है जो सदैव राजनैतिक द्रष्टि से चर्चा का विषय बना रहता है ,उन्नाव जिले में ७ विधानसभा थी ,इस चुनाव में संशोधित करके ६ कर दिया गया है ,वर्तमान राजनैतिक  नजरिये से देखें तो यहाँ की सात विधानसभा में ५ विधायक  सपा के हैं और २ विधायक बसपा के हैं ,जो सपा बाहुल्य क्षेत्र  काफी समय से बना हुआ है ,पर बसपा यहाँ पर अपने चिर प्रतिदुंदी  अंदाज़ में पिछली बार की तरह इस बार भी जातिगत वोट के अनुसार प्रत्याशी  का चुनाव करने वाली है .
                                                          भाजपा की दशा यहाँ पर आसमजस्य  की बनी हुयी, वही उन्नाव  लोकसभा में हुई  अप्रत्याशी विजय से कांग्रेस  पार्टी में अजब सा जोश है, पर फिर  भी सभी राजनैतिक विशेषज्ञ  का मानना है एक बार फिर से   सपा का परचम उन्नाव जिले की अधिक से अधिक  सीटों पर होगा ,क्यूंकि कांग्रेस की कार्य  शैली से आम जनता परेशान है , और बसपा अपने वादे के मुताबिक़ जनता को अपने तरफ नहीं  खीच सकी ,वही भाजपा  के बारे में कह पाना  मुशिकल  है ,यदि भाजपा यहाँ पर कमल खिलाती है तो यह इश्वरी दया ही होगी ...वैसे बाकी रिजल्ट्स  तो चुनाव नतीजे  के  बात ही पता चलेंगे तब कहा जा सकेगा  की .....अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे !!! 

Wednesday, March 23, 2011

....अच्छा दोस्त मिल गया.....

तुम्हे देखकर ना जाने मुझे  क्या हो गया होगा ,

तुमने केवल हंस दिया मै मद होश हो गया .

पहली मुलाक़ात में तुमने ने मुझसे कह दिया
 
कुछ कहो, फिर तुमने  धीरे से हंस दिया 

मै समझा की कोई , मुझे अपना मिल गया 
तुमने यूँ मुझे दोस्त समझा ,मै इससे डर गया
 
मैंने अपने मन को  समझाया की कोई नही, 
प्यार ना सही कम से कम अच्छा दोस्त मिल गया ...
.................................................आशू शुक्ल 

Friday, December 3, 2010

रम में रमता गया

सुनाता सबकी गया करता अपनी गया ,
ना जाने क्यों मै अपनी राम में रमता गया
सोच था  कुछ और करूँगा पर,
ना जाने क्यूँ मै अपने पथ से भटकता गया 
अब यहाँ हूँ जैसे भी हूँ ,
नाखुश होकर भी खुश होता गया 
दूर रहकर भी अजनबियों के करीब होता गया ,
धीरे - धीरे अपनो से दूर होता गया 
'आशू'  गिरकर भी ना संभल पाये,
आकर यहाँ पर यही गाता गया |
ना जाने क्यूँ  मै अपनी रम में रमता गया .........
.................(आशू शुक्ल )


Sunday, October 24, 2010

Friday, October 22, 2010

दिल का मामला है जरा देख भाल के , नजरे मिलाइए यहाँ दिल को संभाल के

दिल का मामला है जरा देख भाल के
नजरे मिलाइए यहाँ दिल को संभाल के

प्यारी सी मुस्कुराहट जीने नहीं देगी
जो पूछ लिया हाल यहाँ बेहाल के

सच्ची मोहब्बत कि उम्मीद कम करना
वरना सब छोड़ देंगे यहाँ खेल खाल के

वफ़ा और वफाई तो बईमानी है यहाँ
बस लोग जी रहे है यहाँ सब झेल्झाल के

कौन कैसा वादा क्या किया था हमने
'मनी' अब तो बैठे यहाँ सब देखभाल के
................................मनीष शुक्ल