ना जाने क्यों मै अपनी राम में रमता गया
सोच था कुछ और करूँगा पर,
ना जाने क्यूँ मै अपने पथ से भटकता गया
अब यहाँ हूँ जैसे भी हूँ ,
नाखुश होकर भी खुश होता गया
दूर रहकर भी अजनबियों के करीब होता गया ,
धीरे - धीरे अपनो से दूर होता गया
'आशू' गिरकर भी ना संभल पाये,
आकर यहाँ पर यही गाता गया |
ना जाने क्यूँ मै अपनी रम में रमता गया .........
.................(आशू शुक्ल )
bahut achhi soch ka vistaaran hai ye ashu ji.............
ReplyDeletemanish ji aap ka bahut-2 dhanyawaad............
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