Wednesday, March 23, 2011

....अच्छा दोस्त मिल गया.....

तुम्हे देखकर ना जाने मुझे  क्या हो गया होगा ,

तुमने केवल हंस दिया मै मद होश हो गया .

पहली मुलाक़ात में तुमने ने मुझसे कह दिया
 
कुछ कहो, फिर तुमने  धीरे से हंस दिया 

मै समझा की कोई , मुझे अपना मिल गया 
तुमने यूँ मुझे दोस्त समझा ,मै इससे डर गया
 
मैंने अपने मन को  समझाया की कोई नही, 
प्यार ना सही कम से कम अच्छा दोस्त मिल गया ...
.................................................आशू शुक्ल 

Friday, December 3, 2010

रम में रमता गया

सुनाता सबकी गया करता अपनी गया ,
ना जाने क्यों मै अपनी राम में रमता गया
सोच था  कुछ और करूँगा पर,
ना जाने क्यूँ मै अपने पथ से भटकता गया 
अब यहाँ हूँ जैसे भी हूँ ,
नाखुश होकर भी खुश होता गया 
दूर रहकर भी अजनबियों के करीब होता गया ,
धीरे - धीरे अपनो से दूर होता गया 
'आशू'  गिरकर भी ना संभल पाये,
आकर यहाँ पर यही गाता गया |
ना जाने क्यूँ  मै अपनी रम में रमता गया .........
.................(आशू शुक्ल )


Sunday, October 24, 2010

Friday, October 22, 2010

दिल का मामला है जरा देख भाल के , नजरे मिलाइए यहाँ दिल को संभाल के

दिल का मामला है जरा देख भाल के
नजरे मिलाइए यहाँ दिल को संभाल के

प्यारी सी मुस्कुराहट जीने नहीं देगी
जो पूछ लिया हाल यहाँ बेहाल के

सच्ची मोहब्बत कि उम्मीद कम करना
वरना सब छोड़ देंगे यहाँ खेल खाल के

वफ़ा और वफाई तो बईमानी है यहाँ
बस लोग जी रहे है यहाँ सब झेल्झाल के

कौन कैसा वादा क्या किया था हमने
'मनी' अब तो बैठे यहाँ सब देखभाल के
................................मनीष शुक्ल